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देखें चौंकाने वाली रिपोर्ट❗पंजाब के 12 जिलों में जानलेवा बना पानी

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पंजाब : दुनिया भर के कई देशों में भू-जल (जमीन के नीचे का पानी) में आर्सेनिक की मौजूदगी एक बड़ी चिंता बन चुकी है। आर्सेनिक एक प्राकृतिक धातु है, जो रंगहीन और गंधहीन होने के कारण पानी में घुलकर भी पहचान में नहीं आती। यही वजह है कि लोग अनजाने में आर्सेनिक मिला पानी पीते रहते हैं।❗विशेषज्ञों के अनुसार, लंबे समय तक आर्सेनिक युक्त पानी के संपर्क में रहने से फेफड़ों, ब्लैडर और किडनी के कैंसर का खतरा बढ़ जाता है। इसके अलावा त्वचा पर हाइपरकेराटोसिस और पिग्मेंटेशन जैसी समस्याएं भी उत्पन्न हो सकती हैं। एक अध्ययन में खुलासा हुआ है कि अगर लोग आर्सेनिक युक्त पानी पीना बंद कर दें, तो मौत का खतरा 50 प्रतिशत तक कम हो सकता है, भले ही व्यक्ति कई वर्षों तक इसके संपर्क में रहा हो। एक रिपोर्ट के मुताबिक, देश के 25 राज्यों के करीब 230 जिले भू-जल में बढ़ते आर्सेनिक स्तर से प्रभावित हैं। वैश्विक स्तर पर लगभग 500 मिलियन लोग इस समस्या से जूझ रहे हैं।

पंजाब के ❗12 जिलों में पानी में आर्सेनिक का स्तर खतरनाक
जलगत संसाधन मंत्रालय की एक रिपोर्ट के अनुसार, पंजाब के 12 जिलों में भू-जल में आर्सेनिक का स्तर तय सीमा से काफी अधिक पाया गया है। यह रिपोर्ट इस साल मार्च में लोकसभा में पेश की गई थी। रिपोर्ट के मुताबिक अमृतसर, फाजिल्का, फिरोजपुर, गुरदासपुर, होशियारपुर, कपूरथला, श्री मुक्तसर साहिब, पठानकोट, पटियाला, रूपनगर, मोहाली और तरनतारन जिलों में पानी में आर्सेनिक का स्तर 10 पीपीबी से ऊपर दर्ज किया गया। राज्य में कुल 908 पानी के सैंपलों की जांच की गई, जिनमें से 4.8 प्रतिशत सैंपल मानकों पर खरे नहीं उतरे।
केंद्र सरकार ने चेतावनी दी है कि इस समस्या के समाधान के लिए तुरंत कदम उठाने की आवश्यकता है। रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि राज्य के 20 जिलों में नाइट्रेट का स्तर 45 मिलीग्राम प्रति लीटर से ज्यादा है। इनमें बठिंडा जिला नाइट्रेट प्रदूषण से सबसे अधिक प्रभावित पाया गया। नाइट्रेट की जांच के लिए लिए गए 922 नमूनों में से 116 (12.58 प्रतिशत) नमूने फेल मिले। यह स्थिति ‘ब्लू बेबी सिंड्रोम’ समेत नवजात शिशुओं में कई गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकती है।
❗भू-जल में आर्सेनिक बढ़ने के प्रमुख कारण❗चट्टानों और खनिजों (जैसे आर्सेनोपायराइट, रियलगर) में स्वाभाविक रूप से मौजूद आर्सेनिक धीरे-धीरे घुलकर जमीन के नीचे के पानी में मिल जाता है।
कुछ ज्वालामुखी प्रभावित क्षेत्रों में थर्मल स्प्रिंग्स और भू-वैज्ञानिक प्रक्रियाएं सतही और भू-जल में आर्सेनिक के ऊंचे स्तर का कारण बन सकती हैं।आर्सेनिक युक्त सल्फाइड खनिजों का ऑक्सीकरण भी एक प्राकृतिक प्रक्रिया है, जो भू-जल में आर्सेनिक छोड़ता है।सोना और अन्य खनिज निकालने वाली माइनिंग से निकलने वाला गंदा पानी आर्सेनिक से भरपूर हो सकता है, जो भू-जल को प्रदूषित करता है।
रसायन, डाई और अन्य उद्योगों से निकलने वाला आर्सेनिक युक्त अपशिष्ट अक्सर जमीन में रिसकर भू-जल को दूषित कर देता है।
आर्सेनिक युक्त कीटनाशकों और उर्वरकों का लंबे समय तक उपयोग भू-जल में प्रदूषण बढ़ा सकता है।
भूमिगत पानी का अत्यधिक दोहन गहरे स्तरों से आर्सेनिक युक्त पानी को ऊपर की ओर खींच लाता है, जिससे बड़े स्तर पर प्रदूषण बढ़ जाता है।
आर्सेनिक से बचाव के उपाय
हमेशा फ़िल्टर किया हुआ या शुद्ध पानी ही पिएं। आरओ वॉटर प्यूरीफायर जैसे फिल्टर आर्सेनिक हटाने में काफी प्रभावी होते हैं।
ऑक्सीकरण–फिल्ट्रेशन जैसी तकनीकें पानी से आर्सेनिक को ऐसे रूप में बदल देती हैं जिसे आसानी से फ़िल्टर किया जा सके।
कम लागत वाले बायोसैंड फ़िल्टर भी आर्सेनिक हटाने में कारगर साबित हो रहे हैं।बरसात के पानी की संभाल और वॉटरशेड प्रबंधन तकनीकें साफ और आर्सेनिक-मुक्त पानी उपलब्ध कराने में मददगार हो सकती हैं।