दुनिया के तीसरे सबसे अमीर व्यक्ति को क्यों देना पड़ा टीवी इंटरव्यू ? क्या विपक्ष के दबाव के चलते दिया इंटरव्यू ?
31दिसंबर ( रिची रोहित ) । इन दिनों अडानी की इंटरव्यू चर्चा में है गौरतलब है कि उद्योगपति अदानी ने एक राजनेता की तरह इंडिया टुडे को अपना इंटरव्यू दिया | जिसमें यह एक प्रायोजित कार्यक्रम के तहत अपनी सफाई देते दिखे कि उनकी मोदी सरकार में अट्ठारह सौ प्रतिशत की अप्रत्याशित वृद्धि में मोदी सरकार का कोई हाथ नहीं है ! गौरतलब है कि अंबानी ने पिछले 10 वर्षों में 400% की ग्रोथ हासिल की है वही अदानी ने 1800% से अधिक ग्रोथ हासिल की | हालांकि उनका कहना है वह समय-समय पर तरक्की करते आए हैं चाहे वह मनमोहन सिंह द्वारा किए गए आर्थिक सुधार हो या राजीव गांधी जी के द्वारा उठाए गए कदम हो | लेकिन यह जानना भी जरूरी कि गुजरात के बिजनेसमैन अदानी जिस समय वहां तरक्की कर रहे थे वहां लंबे समय से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ही शासन था जो कि उस समय के मुख्यमंत्री के रूप में | अदानी का इंटरव्यू ने इस बात की मुहर लगा दी है की दाल में कुछ ना कुछ काला जरूर है नहीं तो इतने बड़े बिजनेसमैन को किसी सरकार की सफाई देने के लिए क्यों आना पड़ा ?
यह जानना भी जरूरी कि 4 साल पहले भी गौतम अडानी ने एक ऐसा इंटरव्यू दिया था और सूट बूट की सरकार के जवाब में उन्होंने कहा था कि उनका सरकार के साथ संबंध वोट देने जितना ही है |
उनके इंटरव्यू के बाद बहुत से सवाल उठ खड़े हो रहे हैं जिसका जवाब आने वाले समय में सरकार को देना और भी कठिन होगा | बरहाल यदि 2024 में केंद्र में सरकार बदलती है तो क्या इस बात का खतरा मंडरा रहा है अडानी पर की उसकी सारी संपत्ति की समीक्षा की जाएगी ? कि उसने हर जगह सरकार की मदद से कांटेक्ट हासिल किए हैं तमाम हवाई अड्डे, समुद्री पोर्ट, खदानें, जंगलात जमीने ऐसा क्यों है कि सिर्फ एक ही आदमी को अत्यधिक मुनाफा हुआ या हो रहा है ? एक विदेशी प्रतिष्ठित पत्रिका के अनुसार साल 2021 में अडानी की संपत्ति में दुनिया में सबसे ज्यादा वृद्धि दर्ज की गई 49 बिलीयन डॉलर और अब वह दुनिया के तीसरे सबसे ज्यादा दौलतमंद इंसान हैं | बिजनेस स्टैंडर्ड की एक खबर के मुताबिक 2016 से 2020 यानी 4 साल में गौतम अडानी की संपत्ति में लगभग 3 गुना इजाफा हुआ है | यानी जो जादुई चिराग इस बिजनेसमैन के हाथ लगा वह आज तक किसी बिजनेसमैन के हाथ नहीं लगा अगर यह कहा जाए तो गलत नहीं होगा | सरकार की जिम्मेदारी होती है कि कहीं ऐसा ना हो कि सारे संसाधनों का कब्जा एक ही इंसान के हाथ में चला जाए और वह मनमाने दाम उसी के लिए वसूल ना कर पाए | पिछले कुछ वर्षों में अमीर और गरीब की खाई बढ़ती ही चली जा यदि यह खाई बढ़ती चली गई तो सरकारों को आंतरिक विरोध का सामना करना पड़ सकता है | इस इंटरव्यू की समीक्षा बड़े-बड़े पत्रकारों ने की है जिसमें सरकार और अडानी की घबराहट की झलक साफ दिखाई देती है ! बरहाल खबर की समीक्षा पाठको पर छोड़ते हैं और उनकी जागरूकता की उम्मीद करते हैं |







