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जालंधर नगर निगम (ladhewali) मे जिस बिल्डिंग पर कार्रवाई करता है उसे ठीक थोड़ी दूरी पर बिल्डिंग की कंप्लेंट पर भी कोई कार्यवाही नहीं ये क्या खेल है निगम के अंदर ?

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डीडी,न्यूजपेपर । जालंधर  यही बिल्डिंग से पहले जिस बिल्डिंग पर जालंधर नगर निगम ने ladhewali मे कार्रवाई करते हुए उस बिल्डिंग को गिरा दिया था वही बिल्डिंग से कुछ दूरी पर यही बिल्डिंग बन रही है इससे पहले की उस बिल्डिंग की तो किसी ने कंप्लेंट की थी तो कारपोरेशन है उस पर इतना सख्त एक्शन लिया और उसको गिरा दिया और इस बिल्डिंग की तो कंप्लेंट को कम से कम 20 से 25 दिन हो चुके हैं यह बिल्डिंग ladhewali रोड पर ग्रीन काउंटी फ्लैट से पहले है यहां तक कि कारपोरेशन

का एक अधिकारी तक यहां पर विजिट करने नहीं आया और हमने उनको पहले सूचित भी किया पर बिल्डिंग मालिक के हौसले इतने बुलंद कि उन्होंने इसकी एक मंजिल का लेंटर तक डाल दिया और वही ( ladhewali ) यूनिवर्सिटी रोड पर और भी बहुत नजायज बिल्डिंग बन रही है पर कार्रवाई किसी पर नहीं हो रही जालंधर नगर निगम के अधिकारी या तो यहां पर आते हैं और अपनी सेटिंग करके चले जाते हैं क्योंकि बिना सेटिंग के इस रोड पर इतनी कमर्शियल बिल्डिंग नही बन सकती क्योंकि कारपोरेशन के रूल के मुताबिक एक भी बिल्डिंग नहीं बन सकती पर बन गई हैं जिसकी कारपोरेशन के कमिश्नर तक को भनक नहीं लगी बिल्डिंग प्रापर्टी टैक्स कम भरना पड़े और शुल्क कम देना पड़े, इसके लिए कुछ शातिर लोगों ने अलग ही फंडा तैयार कर लिया है। ऐसे लोग पहले निगम कार्यालय में रिहायशी मकान बनाने का नक्शा पास करवाते हैं और फिर कामर्शियल बिल्डिंग खड़ी कर रहे हैं। जब तक अधिकारियों व कर्मचारियों को पता लगता है तो बिल्डिंग का 70 से 80 फीसद काम पूरा भी हो चुका होता है। ऐसे में नोटिस देने के बावजूद कोई असर नहीं होता। अगर अधिकारी कार्रवाई करने की बात भी करते है तो बिल्डिंग धारक कोर्ट में जाकर स्टे ले लेते हैं। ऐसे में कुछ समय केस चलता रहता है।  अधिकारियों को तबादला होने के बाद फिर मामला ठंडे बस्ते में चला जाता है।

जालंधर के भी कई इलाकों में यही हो रहा है। 40 फीसद  भवन ऐसे है जिनके पास ना तो नक्शा है और ना ही किसी प्रकार की एनओसी है। अगर अधिकारी कार्रवाई भी करते है तो किसी ने किसी का फोन आकर मामला अटक जाता है। शहर के लद्देवाली इलाके में यूनिवर्सिटी के पास भी कुछ दुकानें तैयार हो रही हैं। हालांकि चेकिंग में पता चला कि इस जगह का रिहायशी इमारत नक्शा पास है।अब देखना है कि निगम अधिकारियों की इन पर नजर कब पड़ती है। कहीं यही न हो कि इमारत तैयार हो जाए और निगम का इधर ध्यान ही न जाए।