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पंजाब में बढ़ते अपराध और अश्लील सामग्री का प्रसार:श्री अनंतगुरु ॐ वरुण अन्तःकरण जी

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जालंधर।3/December  जालंधर शहर में एक मासूम नाबालिग के साथ दुष्कर्म और हत्या की भीषण घटना के बाद एक माँ और उसकी बच्ची के साथ दुष्कर्म की सुनवाई ने पूरे प्रदेश के मन को व्यथित कर दिया है। ये घटनाएं न केवल न्याय प्रणाली, बल्कि सामाजिक स्थिरता और सुरक्षा के मोर्चे पर गहरे सवाल खड़े करती हैं। एक ओर जहां न्याय के साथ-साथ समाज में भय का वातावरण अनिवार्य होता दिख रहा है, वहीं प्रशासन की भूमिका पर भी कठोर सवाल उठ रहे हैं।सवाल यह है कि क्या प्रशासन ऐसे जघन्य अपराधों को रोकने में इतना असमर्थ हो गया है कि वह सोशल मीडिया पर फैल रहे अश्लील विज्ञापनों और नकली अश्लील वीडियो के प्रचार तक को नियंत्रित नहीं कर पा रहा? दिन-रात अश्लीलता फैलाने वाले ये विज्ञापन समाज की मानसिकता को दूषित कर रहे हैं, लेकिन प्रशासन मूकदर्शक बना हुआ है। यह सवाल भी गूंज रहा है कि क्या इस कमजोर प्रशासन को हर कार्य के लिए संत समाज द्वारा जगाना पड़ेगा, या फिर सर्वव्यापी न्याय के लिए भैरव दंड विधान की प्रतीक्षा करनी होगी?♦️पावन धरा पर साये बाजारवाद के:❗पंजाब वह पावन धरा है, जिसे संतों और ऋषियों की भूमि कहा जाता है, जहां सबका पेट भरना सिखाया जाता है, न कि किसी का बुरा सोचना। लेकिन आज इसी पावन धरा पर अश्लील विज्ञापनों के माध्यम से लोगों को अंदर से कमजोर और विकृत किया जा रहा है। विशेषज्ञ मानते हैं कि जब कोई व्यक्ति स्वयं पर नियंत्रण खोने लगे, तो उसे तुरंत मनोवैज्ञानिक सहायता लेनी चाहिए। आदिशक्ति की शरण में जाकर मन को स्थिर करने का प्रयास आवश्यक है। परंतु, जब दस वर्ष के बच्चे से लेकर सत्तर वर्ष के बुजुर्ग तक के मोबाइल फोन ऐसे विज्ञापनों से भर दिए जाएं, तो मानसिक स्थिरता बनाए रखना दुष्कर हो जाता है। प्रशासन को देर होने से पहले इस गंभीर मुद्दे पर कार्रवाई करनी ही होगी।🟣सामाजिक पतन का दर्पण: एक विश्लेषण:♦️पिछले डेढ़-दो वर्षों में बढ़ रही ये घटनाएं समाज की कमजोर होती मानसिकता का स्पष्ट दर्पण हैं। स्कूली बच्चियों का बड़ी उम्र के युवकों के साथ भाग जाना, विवाहितों के बाहरी संबंध, चरित्रहीन माता-पिता द्वारा बच्चियों का शोषण, और सम्मानित समझे जाने वाले लोगों का बच्चियों के प्रति दुर्विचार – ये सब यूं ही नहीं हो रहा।मनोवैज्ञानिक इसे गहरी मानसिक अस्थिरता का लक्षण मानते हैं। यह अस्थिरता उस समय और बढ़ जाती है, जब लोग ग्रंथों और सच्ची भक्ति को छोड़कर, धन के लालच में पाखंडियों और कथित प्रेत-शक्तियों की पूजा करने लगते हैं। प्रेत-पूजा धन दे सकती है, लेकिन ज्ञान, स्थिरता, विचारों की शुद्धि और मोक्ष तो केवल सच्ची आध्यात्मिकता से ही मिलता है। सोशल मीडिया के पाखंड और अश्लील नृत्य को आदर्श मानने वाले इस युग में चरित्र की परिभाषा ही धूमिल होती जा रही है।❗एक बड़ी साजिश का आरोप❗गुरुजी द्वारा यह आरोप लगाया जा रहा है कि देश के सबसे मजबूत राज्यों में से एक, पंजाब के युवाओं को मानसिक रूप से कमजोर करने की यह एक बड़ी साजिश है। चलचित्रों की भ्रमित करने वाली दुनिया में खोया समाज अपने संस्कारों को भूल रहा है। इसी अस्थिरता का लाभ अश्लील विज्ञापनों का धंधा करने वाले तत्व उठा रहे हैं। ऐसे में, ध्यानयोग (मेडिटेशन) को दिनचर्या का अनिवार्य अंग बनाना, आत्म-नियंत्रण के लिए सर्वोत्तम उपाय साबित हो सकता है।❗भविष्य की चेतावनी और समाज का दायित्व❗हत्या और दुष्कर्म के दोषियों को कानून क्या दंड देगा, यह भविष्य तय करेगा। लेकिन चिंता इस बात की है कि समाज ऐसी घटनाओं को कुछ समय बाद भूलकर सामान्य होने लगता है। यदि पंजाब का समाज आज सचेत नहीं हुआ, तो उसे अन्य महानगरों जैसी स्थिति का सामना करने में देर नहीं लगेगी। आने वाले वर्षों में राज्य की नैतिक नींव को कमजोर करने की साजिश को विफल करने के लिए तत्काल सामाजिक सुधार अनिवार्य है।श्री अनंतगुरु ॐ वरुण अन्तःकरण जी ने एक गंभीर चेतावनी देते हुए कहा है, “मैं, महादेव का शिष्य, इन दोषियों को भैरव दंड विधान के अंतर्गत होने वाली सभी यातनाओं का पूर्ण दर्पण दिखाऊंगा, ताकि ऐसे पापी भविष्य में ऐसा कर्म या विचार भी न लाएं। पर यह अंत नहीं, बल्कि संतों, ऋषियों और गुरुओं की इस पावन भूमि को बचाने का आरंभ है। इसमें पूरे समाज का साथ अनिवार्य है। हमें यह सिद्ध करना है कि जब काल आए, तो हम गुरुओं की वाणी और उनके बलिदान का मान रखते हुए इस धरा के रक्षक बने।”स्पष्ट है कि केवल कानूनी कार्रवाई ही पर्याप्त नहीं है। पंजाब को अपनी आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत की ओर लौटकर, एक स्थिर, चरित्रवान और सशक्त समाज के निर्माण की ओर कदम बढ़ाना होगा।