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अतीक हुआ अतीत…एक बेटा मारा गया, 2 बेटे जेल में, 2 जुबेनाइल में

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Doaba News Jalandhar

असद के एनकाउंटर के साथ ही यूपी के माफिया और डॉन अतीक अहमद की जुर्म की दुनिया का किला ढह गया है। जिस अतीक के केस की सुनवाई करने में 10-10 जज बदल जाते थे वही अतीक बेटे की मौत के बाद अदालत में रोता रहा। पहली बार अतीक अपना अतीत देख पछताया वो भी तब जब उसका बेटा मारा गया। अभी उसके 2 बेटे जेल में और 2 जुबेनाइल में हैं। विधायक के मर्डर के एकमात्र गवाह उमेश पाल हत्याकांड में शामिल अतीक अहमद का बेटा असद के साथ ही शूटर गुलाम मोहम्मद को भी पुलिस ने एनकाउंटर में मार दिया है।

 

अतीक अहमद जिसे यूपी पुलिस साबरमती जेल से लेकर आई है।

 

अतीक का कुनबा…यूं तिनका-तिनका हुआ

अतीक अहमद- चांद बाबा की हत्या के बाद क्राइम की दुनिया में पैर रखा. अभी यूपी पुलिस साबरमती जेल से लेकर आई है।
भाई अशरफ- इसी ने विधायक राजू पाल को मारा था। मुख्य भूमिका भी रही।
पत्नी शाइस्ता- विधायक की हत्या के इकलौते गवाह उमेश पाल की हत्या में हाथ। अभी पुलिस के हाथ नहीं आई है।
बेटा असद- कोर्ट के बाहर कार से निकल गोलियां चलाकर उमेश पाल को मारा। पुलिस ने एनकाउंटर कर दिया है।
बड़ा पुत्र मोहम्मद उमर- यह लखनऊ की जेल में है और वसूली का धंधा इसी के माध्यम से चलता था।
छोटा पुत्र अली अहमद- उत्तर प्रदेश की नैनी सेंट्रल जेल में बंद है। हत्या का आरोप है।
अहजम अहमद- अतीक का यह चौथे नंबर का बेटा है। अभी बालिग नहीं है। उमेश पाल को मारने की साजिश में आरोपी है।
छोटा आबान- यह बेटा भी अभी बालिग नहीं है। इस पर भी उमेश पाल हत्याकांड की प्लानिंग में शामिल होने का आरोप है।

चांद से शुरुआत, जमीं पर खत्म

अतीक को शायद आभास हो गया था कि वह अब छूटने वाला नहीं है। अपराध की दुनिया में भी उसका नाम फीका पड़ रहा था। इसलिए उसने बेटे अतीक को बड़े कांड से उतारने का प्लान बनाया लेकिन पहले ही प्रयास में सुपरहिट तो रहा पर मारा गया। चांद बीबी को मारकर क्राइम में नाम बनाने वाले असद का बेटा पुलिस ने जमीं में लेटा दिया। अतीक के पिता प्रयागराज में तांगा चलाकर परिवार पालते थे। अतीक मेट्रिक फेल होने के बाद जुर्म की तरफ बढ़ा। तब इलाके में चांद बाबा का सिक्का चलता था। वो सबको खटक रहा था। अतीक को मोहरा बनाकर पुलिस और राजनीति के लोगों ने उसे खत्म करवा दिया। नाम चला तो 1989 में उसने इलाहाबाद वेस्ट से विस चुनाव जीता। यह चुनाव उसने बिना किसी पार्टी के बैनर तले लड़ा था जीतने के बाद उसे सपा का साथ मिला। वह पांच बार विधायक और एक बार सांसद भी बना।