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भगवंत मान सरकार और गवर्नर में तकरार जारी, क्या है पूरा मामला

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पंजाब के राज्यपाल और भगवंत मान सरकार के लंबे समय से चली आ रही तकरार अभी भी बरकरार है. राज्यपाल बनवारीलाल पुरोहित द्वारा पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान को उनके 10 पत्रों का जवाब न देने के मामले के बाद अब राज्यपाल ने सरकार को पत्र लिखकर ये पूछा है कि 19 और 20 जून को विधानसभा का विशेष सत्र क्यों बुलाया जा रहा है. राज्यपाल ने सरकार से सत्र के एजेंडे के बारे में भी पूछा है.

हालांकि सरकार ने भी राज्यपाल को पत्र का जवाब देते हुए लिखा है कि सरकार दो दिनों के बजट सत्र के विस्तार का आयोजन कर रही है. सरकार का कहना है कि कार्य मंत्रणा समिति (बीएसी) सत्र का एजेंडा तैयार कर रही है और जैसे ही यह तैयार होगा, राज्यपाल को इसकी जानकारी दी जाएगी. सूत्रों का कहना है कि पंजाब सरकार दिल्ली में सेवाओं के नियंत्रण पर केंद्र के अध्यादेश की निंदा करने के लिए एक प्रस्ताव लाने की योजना बना रही है. इसके अलावा, राज्य में गौरव यादव को DGP के रूप में बनाए रखने की अनुमति देने के लिए पुलिस सेवा अधिनियम, 2007 में संशोधन करना चाहती है.

विधानसभा अध्यक्ष कुलतार सिंह संधवां द्वारा मार्च में अनिश्चितकाल के लिए स्थगित किए जाने के बाद राज्य सरकार ने सत्र का सत्रावसान नहीं कराया था. सरकार ने सत्र को चालू रखने और सत्रावसान न कराने के लिए यह प्रथा तब से शुरू की है जब से राज्यपाल ने भाजपा के ऑपरेशन लोटस की निंदा करने के लिए विशेष सत्र बुलाने की मंजूरी नहीं दी थी. बाद में सरकार को सत्र आयोजित करने के लिए सर्वोच्च न्यायालय का रुख करना पड़ा था. सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को राहत देते हुए सत्र आयोजित करने की अनुमति दे दी थी. राज्यपाल और सीएम के बीच पिछले एक साल से टकराव चल रहा है। राज्यपाल ने मंगलवार को ही सीएम को लिखा था कि उन्होंने उन्हें लिखे कम से कम 10 पत्रों का जवाब नहीं दिया है.

AAP के मुख्य प्रवक्ता मलविंदर सिंह कंग ने आरोप लगाया था कि राज्यपाल बनवारीलाल पुरोहित केंद्र के निर्देशों का पालन कर रहे हैं और पंजाब और पंजाब सरकार के खिलाफ साजिश रच रहे हैं और पंजाब की विपक्षी पार्टियां भी इसमें उनका साथ दे रही हैं. कंग ने आरोप लगाया था कि विपक्ष के नेता के सुझाव पर राज्यपाल ने बजट सत्र के दौरान अपने अभिभाषण के दौरान अपनी सरकार को ‘मेरी सरकार’ के रूप में संदर्भित करने से इनकार कर दिया था और केवल सरकार शब्द का इस्तेमाल किया जो असंवैधानिक है. उन्होंने कहा कि पंजाब के राज्यपाल होने के नाते उन्होंने पंजाब विश्वविद्यालय में हरियाणा के हिस्से की खुलकर वकालत की, लेकिन दुर्भाग्य से विपक्षी दलों और उनके नेताओं ने इस गंभीर मुद्दे पर कोई सवाल नहीं उठाया.